स्वच्छ भारत

स्वच्छता ही देवभक्ति है!ऐसा कहा जाता है कि देवभक्ति का मार्ग स्वच्छता से हो के जाता है। जहां कहीं भी स्वच्छ पर्यावरण होता है, ईश्वर का वास वहीं होता है। हमारे आज के परिपेक्ष्य में यह बात शत प्रतिशत सत्य है। आधुनिक जीवन, बढ़ती जन संख्या, शहरीकरण, जल की कमी और असन्तुलित योजनाएं हमारे देश में अनेक समस्याओं की जड़ हैं। जिनमें प्रमुख समस्या गंदगी तथा प्रदूषण की है। विकास की होड़ में अंधाधुंध शहरीकरण हो रहा है। जनसंख्या असीमित रूप से बढ़ रही है। फलस्वरूप राष्ट्र के हर प्रदेश में, चाहे शहर हो या गांव, प्रदूषण तथा गन्दगी की समस्य एक विकट स्वरूप ले चुकी है। हम जहां भी जाएँ, गंदगी किसी न किसी रूप में ज़रूर देखने को मिलती है। हमारे घरों एवं मोहल्लों में कूड़ा बिखरा मिलता है। सड़कों पर भी अक्सर कूड़ा फेंका जाता है। रेलों, पटरियों, और जल मार्गों को भी प्रदूषित किया जा चुका है। इतना ही नहीं, महानगरों, शहरों और गावों के बाहर मल के ढेर आसमान छूते नज़र आते हैं। शौचालय की उपयुक्त व्यवस्था न होने के कारण हमारी जनसंख्या के अधिकांश लोग खुले में शौच करने को विवश हैं। इसकी वजह से जल के स्रोतों का भारी प्रदूषण हो चुका है। हमारी नदियाँ इस स्तर तक प्रदूषित हो चुकीं हैं कि उनमें अब जीवन संभव नहीं है।

इस विकट समस्या से जूझने के लिये भारत सरकार ने एक समग्र योजना बनाई है। इसका प्रारम्भ स्वयँ माननीय प्रधान मंत्री महोदय ने गांधी जयंती पर किया है। यह केवल एक योजना नहीं बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। स्वच्छ भारत अभियान। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता को प्राथमिकता दी गयी है। इस बहुआयामी परियोजना के विभिन्न स्तर हैं। एक तरफ केंद्र सरकार प्रदूषण एवं गन्दगी की रोकथाम के लिये मुद्रा और अन्य संसाधन मुहैय्या करायेगी। वहीं दूसरी तरफ एक सामाजिक मुहिम छेड़ा गया है जिस से की जन साधारण में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पनपे। इसमें असभ्य स्तरों पर कार्य किया जाएगा। घरों और मुहल्लों की सफाई से लेकर, पूरे शहर के कूड़े को पर्यावरण अनुरूप तरीके से व्यवस्थित किया जायगा। शौचालयों का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। साथ ही जन मानस में खुले शौच को रोकने के लिये कदम उठाये जा रहे हैं। जल स्रोतों एवं नदियों को साफ करने के लिये मुहिम शुरू की गई है। साथ ही कूड़ा पैदा ही न हो इस पर भी जोर दिया जा रहा है। प्लास्टिक के विभिन्न रूपों को या तो प्रतिबंधित किया जा रहा है या उनके उपयोग ओर अंकुश लगाया जा रहा है।

स्वच्छ भारत अभियान की सफलता के लिए भारत के हर नागरिक को बढ़ चढ़ कर सम्मिलित होने की ज़रूरत है।

आइये हम सब प्रण लें कि इस अभियान को सफल बना कर हम अपने राष्ट्र को देवत्व की ओर अग्रसर करेंगे!

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